Wednesday, 20 December 2023

 

ख़ाक में न जाने कब छन चुका है वो

जिससे रूबरू होने की फुर्सत न थी

कभी आईने के सांचे में ढले मैं को

खुद की शिनाख्त करने की फुर्सत न थी

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