तेरी ख़ामोशी में अलफ़ाज़ क्या पिरोये
शायरी के बहाने इज़हार ए इश्क़ कर गए
हमारे जानाज़े पर तुमने सुभानअल्लाह क्या कहा
हम ज़िंदा थे और कफ़न ओढ़कर मर गए
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