Saturday, 18 April 2026

 ये जो आसमां है, जाने कैसा कुआँ है 

गर्भ में पाताल है मुख पर धुआँ है 

एक एक कर सब को निगल जाता है 

अकसर अमूमन आँखों में पिघल जाता है

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