ये जो काली यादों में मेरे अश्क़ रिस्ते हैँ
अलफ़ाज़ों में घुले दर्द किसको दिखते हैँ
स्याही में कभी अश्क़ उभर कर छलक़ जाता है
कहते हैँ लोग कोयले में हीरा चमक जाता है
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