Tuesday, 23 June 2026

 र लफ्ज़ के कफ़न में मुझको पहचानो 

बँधी है मेरी रूह मुसलसल रिवाज़ में 

दाद देनी है तो ख़त्म करो मुशायरों को 

अर्ज़ होगा वो जो है दबा कुछ लिहाज़ में

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