माँ बाप
घर में बच्चों की गूँजती आवाज़ों,
उनकी मस्ती की ख़्वाइश में
अक्सर मुस्कराते,ठंडी आहें भरते हैँ,
थोड़ी दूर भी जाने से कतराते,
उसमें भी हर दूसरे कदम पर ठहरते हैँ,
बेहद फ़िक्र से बार बार पूछते,
फ़िर भी पूछकर हमारे गुस्से से डरते हैँ,
हम रोते आये उनकी ख़ुश बाहों में,
वो खुशी से हमारी बिलख़्ती बांहों में मरते हैँ
ना जाने वो क्यूँ ऐसा करते हैँ.
जो जानते हमारा उनके बाद में हाल
तो शायद कभी मरते नहीं, कभी ऐसा करते नहीं.
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